लोक प्रशासन में पोस्डकॉर्ब सिद्धान्त

लोक प्रशासन में पोस्डकॉर्ब सिद्धान्त

लोक प्रशासन के क्षेत्र के सम्बन्ध में लूथर गुलिक (Luther Gulick) द्वारा व्यक्त विचार विकास प्रशासन के क्षेत्र में भी प्रासंगिक हैं। लूथर ने प्रशासन के क्षेत्र के सम्बन्ध में एक शब्द दिया था लोक प्रशासन में पोस्डकॉर्ब सिद्धान्त यह शब्द अग्रलिखित शब्दों का प्रथम अक्षर है:

P-Planning- नियोजन

O-Organisation – संगठन करना

S-Staffing- कर्मचारी

D-Direction- निर्देशन |

Co-ordination- समन्वय

R-Reporting- प्रतिवेदन

B-Budgeting- बजट-निर्माण

विकास प्रशासन के क्षेत्र में योजनाओं का निर्माण करना, अधिकारियों एवं अन्य सेवि-वर्गों का संगठन  बनाना, कर्मचारियों की श्रृंखलाबद्ध व्यवस्था करने का कार्य शामिल है ताकि प्रत्येक कर्मचारी द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में उन्हें सत्ता प्रदान की जा सके तथा उन्हें कार्य के सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश दिया जा सके। विकास प्रशासन के क्षेत्र के अन्तर्गत समन्वय का भी महत्वपूर्ण अधिकार शामिल है । विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपे गये कार्यों के मध्य समन्वय स्थापित करना मुख्य कार्य है ताकि कार्यों के दुहराव को रोका जा सके। विकास प्रशासन के क्षेत्र के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की सूचनाओं और आँकड़ों के आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना तथा बजट का निर्माण करना जैसे प्रमुख कार्य भी शामिल हैं।

स्टाफ एजेंसियों के कार्य

पोस्डकॉर्ब दृष्टिकोण

यह दृष्टिकोण दो कारणों से प्रकट हुआ

  • प्रबन्धकीय विद्वानों द्वारा प्रशासन को प्रबन्ध मानना।
  • एक सार्वभौमिक प्रशासनिक विज्ञान की उनकी संकल्पना।

सर्वप्रथम लूथर गुलिक ने उन सिद्धांतों की चर्चा की जिनमें पोस्डकॉर्ब की गतिविधियाँ सम्मिलित थी। अन्तत: लूथर गुलिक ने 7 प्रबन्धकीय कार्यों के अंग्रेजी शब्दों के प्रथम अक्षरों को लेकर POSDCORB विचारधारा प्रतिपादित की।

P = (प्लानिंग, अर्थात् नियोजन) यह प्रशासन की पहली क्रिया है, जिसके तहत किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाती है। इसके अन्तर्गत ही उद्देश्य प्राप्ति के लिए आवश्यक कार्य-नीतियों का निर्धारण किया जाता है। जैसे-क्या करना है? कौन करेगा? कैसे करेगा? कब करेगा? आदि का आकलन और नियोजन।

O = (ऑर्गेनाइजिंग अर्थात् संगठन करना) इसके अन्तर्गत प्रशासन कार्यों का विभाजन और आवण्टन इस प्रकार करता है कि

  • सही व्यक्ति को सही काम मिल सके।
  • प्रत्येक व्यक्ति को कार्य के अनुपात में सत्ता सौंपी जा सके और तद्नुरूप उसका उत्तरदायित्व तय किया जा सके।
  • कार्मिकों के मध्य कार्य सम्बन्धों को निर्धारित करना।

जिला प्रशासन की अवधारणा (Concept of District Administration)

S = (स्टाफिंग अर्थात् कार्मिक व्यवस्था) संगठन की आवश्यकतानुरूप व्यक्तियों की प्राप्ति, उनका प्रशिक्षण और पदस्थापना।

D= (डायरेक्टिग अर्थात निर्देशित करना) कार्मिकों को कार्यों-उद्देश्यों की ओर प्रवृत्त करना तथा यह सुनिश्चित करना कि वे अपने कार्य निर्धारित अपेक्षानुरूप करें। इसमें नियन्त्रण शामिल है।

CO = (कोऑर्डिनेटिंग अर्थात् समन्वय करना) संगठन की सभी इकाइयों, उप-इकाइयों, कार्मिकों आदि के मध्य उद्देश्यों की एकता स्थापित करना, उनमें सहयोग या Team भावना उत्पन्न करना तथा संघर्षों को टालना प्रशासन का प्रमुख काम है, जिसे समन्वय कहते हैं।

R = (रिपोर्ट या प्रतिवेदन) अधीनस्थ स्तरों की गतिविधियों से उच्च प्रबन्धक वर्ग प्रतिवेदन के माध्यम से अवगत होता है। ऊपर से अधीन स्तरों पर आदेश इसी आधार पर जारी होते. हैं। इसके तहत उच्च-अधीनस्थ दोनों सूचित रहते हैं।

B = (बजटिंग या वित्तीय व्यवस्था) प्रशासन पर ही अपनी समस्त वित्तीय जरूरतों को पूरा करने तथा आय-व्यय की देख-रेख की जिम्मेदारी होती है। लोक प्रशासन में वित्तीय जरूरतों का आकलन राजनीतिक कार्यपालिका करती है और प्रशासकगण तदनुरूप कार्य करते हैं।

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