लोक प्रशासन का परिचय (भाग – 3)

लोक प्रशासन का परिचय (भाग – 3)

  1. लोक प्रशासन के विकास क्रम के किस चरण में संगठन के सिद्धांतों को‘लोकोक्तियाँ’ कहते हुए चुनौती दी गई – तृतीय चरण
    • लोक प्रशासन के उद्भव के तृतीय चरण: चुनौती का युग(1938-47)
      • इस चरण का मुख्य विषय है लोक प्रशासन का अध्ययन कर मानव संबंध व्यवहार की वकालत।
      • तर्क दिया गया कि राजनैतिकप्रकृति के कारण इसे राजनीतिक से पृथक नहीं किया जा सकताहै,क्योंकि नीति निर्धारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
      • इसी बात को लेकर राजनीतिक प्रशासन वद्विविभाजन को खारिज कर दिया।
      • इस दौर में शास्त्रीय विचारधारा को चुनौती दी गई है।
      • हरबर्ट साइमनप्रशासन के सिद्धांत के प्रबल आलोचक हैं।
      • हर्बर्ट साइमन में प्रशासन के सिद्धांत को कहावतोंव मुहावरों की संज्ञा दी तथा व्यवहार संबंधित उपागम की वकालत की है।
    • इस दौर की महत्वपूर्ण पुस्तकें है-
      • सीएल बर्नार्ड – the function of Executive (1938)
      • मर्क्सटिन मार्क्स –Element of Public Administration (1996)
      • हरबर्ट ए साइमन – AadministrativeBehaviour (1947)
      • रॉबर्ट डहल – The Science of Public Administration Three Problems (1947)
      • ड्वाइट वाल्डो – The Administrative State (1948)
  2. ‘पब्लिक चॉइस स्कूल’कौन-सीअवधारणा निर्धारित करता है – ग्रामीण और स्थानीय प्रशासन
  3. लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन में समानता है – प्रविधियों में
    • लोक प्रशासननिजी प्रशासन से भिन्न है
    • व्यवहार की समानता में
    • वैधिक सत्ता में
    • लोक कल्याण में
  4. लोक प्रशासन निजी प्रशासन से भिन्न नहीं है – प्रबंधकीय तकनीकों में
  5. किसने यह कहा कि प्रशासन तथा प्रबंधन में भेद गुमराह करने वाला तथा मिथ्या है – फेयोल
    • फेयोल ने लोक प्रशासन के क्षेत्र तकनीकी, वित्तीय,व्यावसायिक, सुरक्षा, प्रशासकीय तथा लेखांश के तत्वों को शामिल किया है।
    • “लोक प्रशासन को सरकार की चतुर्थ शाखा के रूप में मान्यता देना बहुत उग्र है, किंतु यह राजनीतिक और प्रशासन के बीच भेद, जो विल्सन ने शुरू किया था का संभवत: सर्वाधिक तर्कसंगत परिमाण है यह कथन किसका है – विलोबी
    • विलोबी के अनुसार, “राजनीतिक विज्ञान में प्रशासन दो अर्थों में प्रयुक्त होता है अपने प्रथम व्यापक अर्थ में यह समस्त सरकारी कार्यों के वास्तविक संपादन से संबंधित है चाहे वह किसी भी शाखा के हो।”
    • विलोबी के अनुसार, “प्रशासन सरकार का चौथा स्तंभ है यह स्तंभ ही शेष तीनों अंगों के कार्य संपन्न करता है।”

लोक प्रशासन का परिचय (भाग – 2)

  1. भुमंडलीकरण से अभिप्राय है – खुली अर्थव्यवस्था
    • भूमंडलीकरण से अभिप्राय पूरी दुनिया को एक भूमंडलीय गांव के रूप में मानने की अवधारणा ही वैश्वीकरण एवं भूमंडलीकरण है।
    • भूमंडलीकरण से तात्पर्य विश्व के समस्त संसाधनों, ज्ञान, जानकारी, जनशक्ति और बाजारों को एक स्तर पर लाते हुए उन्हें निर्बाध रूप से लोगों को उपलब्ध कराने के लिए सभी विकसित अर्थव्यवस्था को एकीकृत एवं आत्मनिर्भर बनाने से होता है।
  2. भारत में आर्थिक उदारीकरण को अपनाया गया – वर्ष 1991
  3. भूमंडलीकरण में किस क्षेत्र को प्राथमिकता नहीं दी जाती है – निजी क्षेत्र में
    • प्राथमिकता दी जाती है
    • सार्वजनिक क्षेत्र में
    • निजी-सार्वजनिक क्षेत्र में
  4. लोक प्रशासन निजी प्रशासन के समान है – अपने मितव्ययिता तथा कार्यकुशलता के मापदंडों द्वारा आंके जाने के कारण
  5. आज सर्वजनिक-निजी के अंतर को समझने की आवश्यकता है – सामाजिक प्रबंधन के संबंध में इन दोनों क्षेत्रों की पूरकता के संदर्भ में
  6. लोक प्रशासन से संबंधित सामान्य कथन
    • इसमें लोक उत्तरदायित्व का अत्यंत व्यापक तत्व था और अब भी है।
    • सरकार में आर्थिक प्रेरक कम प्रभावी होते हैं।
    • इसमें अनुशासन पर अधिक बल दिया जाता है।
    • लोक प्रशासन विषय के बौद्धिक विकास की समीक्षा के लिए निकोल्स हेनरीने बिंदुपथ और केंद्र बिंदु के प्रत्यय का प्रयोग किया।
  7. लोक प्रशासनएक महत्वपूर्ण विषय के रूप में स्थापितहो गया, क्योंकि – जन समस्याओं में वृद्धि हुई
  8. “प्रशासन विषय वस्तु के अनुसार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होगा।” यह वक्तव्यकिसकी व्याख्या करता है – प्रशासन के समेकित दृष्टिकोण की
  9. जोसिया स्टैम्प का मत है कि,“लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन को भिन्न करने वाले चार सिद्धांत है।”
    • एकरूपता का सिद्धांत
    • बाह्यवित्तीय नियंत्रण का सिद्धांत
    • लोक उत्तरदायित्व का सिद्धांत
    • सेवा का उद्देश्य और सीमांत लाभ
  10. “प्रशासन विषय वस्तु के अनुसार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होगा।” यह वक्तव्यकिसकी व्याख्या करता है – प्रशासन के समेकित दृष्टिकोण की

विभाग की परिभाषा

  1. जोसिया स्टैम्प का मत है कि,“लोक प्रशासन तथा निजी प्रशासन को भिन्न करने वाले चार सिद्धांत है।”
    • एकरूपता का सिद्धांत
    • बाह्यवित्तीय नियंत्रण का सिद्धांत
    • लोक उत्तरदायित्व का सिद्धांत
    • सेवा का उद्देश्य और सीमांत लाभ
  2. लोक प्रशासन एक विषय के रूप में – सार्वजनिक सेवाओं तथा कल्याण हेतु लोक नीतियों तथा प्रशासन का बहुविषयी अध्ययन है।
    • संकुचित दृष्टिकोण
    • व्यापक दृष्टिकोण
    • पोस्डकॉर्ब दृष्टिकोण
    • पोकोक दृष्टिकोण
    • लोक कल्याणकारी दृष्टिकोण
  3. लोक प्रशासन के विकास के प्रथम चरण के दौरान (1887-1926) प्रमुख बल था – प्रशासन राजनीतिक द्वैधता
    • लोक प्रशासन का प्रथम चरण राजनीतिक प्रशासन द्विविभाजन(1887-1926)
    • इसकी शुरुआत 1887ई. में राजनीतिक विज्ञानचातुर्मासिक में वुडरो विल्सन के निबन्ध‘द स्टडी ऑफ एडमिनिस्ट्रेश’ के साथ हुई, जिसने लोक प्रशासन के एक स्वतंत्र वपृथक अध्ययन की नींव डाली। इसलिए विल्सन को लोक प्रशासन का पिता कहा जाता है। वुडरो विल्सन का निबंध ‘पॉलिटिकल साइंस क्वॉर्टली’ में प्रकाशित हुआ था।
    • इसकी पुष्टि फ्रेंक जे गुड़नाऊ ने वर्ष 1900 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘पॉली एंड एडमिनिस्ट्रेशन’ में की
    • वर्ष 1926 में एलडी ह्वाइट की ‘इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ नामक पुस्तक प्रकाशित हुई यह लोक प्रशासन की पहली पाठ्यपुस्तक है इसके साथ ही लोक प्रशासन को अकादमी विजेता प्राप्त हो गई।
    • इस चरण की दो विशेषताएं रही है – राजनीतिक और प्रशासन का पृथक्करण तथा लोक प्रशासन का जन्म
  4. प्रशासनिक उद्देश्य ‘लोक’ की अवधारणा में ‘लोकपन’को द्वितीय मिन्नोब्रुक सम्मेलन (1988) द्वारा प्रभावित किया गया – समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के रूप में
    • द्वितीय मिन्नोब्रुक सम्मेलन (1988)
      • इस सम्मेलन का अकादमी दायरा विस्तृत था, जिसमें विधि विज्ञानी, अर्थशास्त्री, नीति एवं नियोजन विश्लेषक तथा नगरीय अध्ययनकर्ता इत्यादि भी सम्मिलित थे।
      • यह सम्मेलन विश्वव्यापी आर्थिक सुधारों के दौरान आयोजित हुआ।
      • इस सम्मेलन की वैचारिक पृष्ठभूमि सुविचार,धैर्ययुक्त,परिपक्व, व्यावहारिक तथा व्यापक सोच युक्त थी।
      • इसमें संवैधानिक तथा कानूनी परिपेक्ष्य में नेतृत्व, प्रौद्योगिक नीति तथा आर्थिक परिवेश पर जोर दिया गया था।
      • यह सम्मेलन लोक प्रशासन में सामाजिक तथा व्यवहारिक विज्ञानों के योगदान को प्रोत्साहित करता है।
      • इस सम्मेलन के दिनों में सरकार तथा राज्य की घटती भूमिका तथा निजीकरण, उदारीकरण, वैश्वीकरण के विचार सामने आ चुके थे। जो सरकार से सीमित किन्तु प्रभावी भूमिका चाहते थे।
  5. लोक प्रशासन की भूमिका
    • Gerald caidenने‘द डायनामिक ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’(1971) में आधुनिक समाज में लोक प्रशासन की भूमिकाओं का वर्णन किया है।
    • नीतियों का क्रियान्वयन
    • स्थिरता एवं व्यवस्था को कायम रखना।
    • सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों को संस्थागत रूप देना। (जैसे – सती प्रथा बाल विवाह)
    • व्यापक स्तर पर वाणिज्यिक सेवाओं का प्रबंधन।
    • वृद्धि एवंआर्थिक विकास को सुनिश्चित करना।
    • समाज के निम्न वर्गों का संरक्षण करना।
    • जनमत का निर्माण
    • लोक नीतियों वराजनीतिक रुझान के प्रभावों को लागू करना।

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