भारत में ब्रिटिश प्रशासन (British administration in India)

भारत में ब्रिटिश प्रशासन (British administration in India)

भारत में ब्रिटिश प्रशासन का बीजरूप में प्रारम्भ 1600 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना के साथ हुआ। 1755 ई. तक एक व्यापारिक संस्था के रूप में ईस्ट इण्डिया कम्पनी अपना अस्तित्व भली-भाँति स्थापित कर चुकी थी। 1757 ई. की प्लासी युद्ध के पश्चात् भारत में ब्रिटिश सत्ता की नींव पड़ी। सन् 1773 से 1858 तक का समय ऐसा रहा जिसे हम ‘दोहरे शासन का काल’ कहते हैं। कम्पनी का शासन तो रहा ही, किन्तु ब्रिटिश संसद भी भारतीय प्रशासन सम्बन्ध मामलों में अधिकाधिक रुचि लेने लगी। 1857 ई. की क्रान्ति ने एक जबदरस्त परिवर्तन का आधार तैयार कर दिया और 1858 से भारत में प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन की शुरुआत हो गई। भारत में ब्रिटिश शासन मोटे तौर पर एक जिला आधारित प्रशासन रहा, जिसमें प्रतिष्ठा और पदसोपान, वेतन स्तर आदि के भारी भेद-भावों के साथ-साथ केन्द्रीय प्रशासन और राज्य-स्तरीय प्रशासनों के लिए दो भिन्न-भिन्न दिशाएँ उभरी। राजस्व और विधि व्यवस्था इस प्रशासन के मूल आधार बने।

तुलनात्मक लोक प्रशासन का अर्थ

भारत में ब्रिटिश शासन काल के अधिनियम (Acts of British rule in India)

आधुनिक अर्थों में, संसदीय शासन प्रणाली एवं विधायी संस्थाओं का प्रारम्भ एवं विकास लगभग दो शताब्दियों तक ब्रिटेन के साथ भारत के सम्बन्धों से जुड़ा हुआ है। परन्तु यह मान लेना सही नहीं होगा कि बिल्कुल ब्रिटेन जैसी संस्थाएँ किसी समय भारत में स्थापित हो गईं। आज जिस रूप में भारत की संसद और संसदीय संस्थाओं को हम जानते हैं उनका विकास भारत में ही हुआ। इनका विकास विदेशी शासन से मुक्ति के लिए और स्वतन्त्र लोकतन्त्रात्मक संस्थाओं की स्थापना के लिए किए गए अनेक संघर्षों और ब्रिटिश शासकों द्वारा रुक-रुक कर, धीरे-धीरे और कई टुकड़ों में किए गए संवैधानिक सुधारों के द्वारा हुआ।

वितीय प्रबन्ध का महत्व

भारत में ब्रिटिश विरासत (British Legacy in India)

भारतीय प्रशासनिक ढाँचा प्रधानतया ब्रिटिश शासन की विरासत है। भारतीय प्रशासन के विभिन्न ढाँचागत और कार्यप्रणालीगत पक्षों जैसे सचिवालय प्रणाली, अखिल भारतीय सेवाएं, भर्ती, प्रशिक्षण, कार्यालय पद्धति, स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन, बजट प्रणाली, लेखापरीक्षा, केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति, पुलिस प्रशासन, राजस्व प्रशासन आदि की जड़ें ब्रिटिश शासन में निहित हैं।

भारत में ब्रिटिश शासन काल को दो चरणों में विभक्त कर सकते हैं –

  1. वर्ष 1858 तक का कंपनी का शासन और
  2. वर्ष 1858 से 1947 तक ब्रिटिश ताज का शासन।

भारतीय प्रशासन में ब्रिटिश शासन की विरासत का अध्ययन तीन शीर्षकों के अंतर्गत किया जा सकता है

  1. संवैधानिक विकास
  2. लोकसेवा का विकास क्रम
  3. अन्य संस्थाओं का विकास